• मलमास तथा शुक्रास्त में शुभ कार्य वर्जित
अकोला :
जब भगवान सूर्य नारायण मीन राशि में चले जाते हैं जोकि महाराष्ट्रीयन पंचांग के अनुसार तथा लगभग सभी पंचांग के अनुसार 14 मार्च को मीन राशि में जाएंगे इसी दिन से मीन की संक्रांति मलमास खरमास लग जाता है| निर्णय सिंधु और व्रत राज जैसे धर्म ग्रंथो के अनुसार किसी भी प्रकार का शुभ कार्य वंचित होता है| इसमें ,मुख्यतः नए कार्य जैसे वास्तु और विवाह इत्यादि प्रमुख है व्रत का आरंभ तथा अंत अर्थात की उद्यापन यह भी वर्जित होता है, शुक्र ग्रह तारा जब अस्त हो जाता है, उससमय भी सभी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित होते हैं| क्योंकि शुक्र को भौगोलिक ज्योतिषीय गणिती के आधार पर प्रेम ,विवाह, कविता काव्य ,श्रृंगार ,बाहर की सुंदरता, इत्र फूल ,प्रेम गीत ,शारीरिक भोग विलास क्षमता, शरीर में वीर्य की स्थिति ,कला मंच कलाकृति ,भौतिक वस्तुएं ,शक्कर, होटल इत्यादि का कारक ग्रह समझा जाता है और यह ग्रह महाराष्ट्र पंचांग के अनुसार 19 मार्च को अस्त होकर के 26 मार्च को उदय होगा दोनों ही कारण होने से सभी प्रकार के शुभ कार्य वंचित होंगे, परंतु 26 तारीख के बाद गणगौर का उद्यापन 100% किया जा सकता है| गणगौर के उद्यापन में किसी भी प्रकार की शंका नहीं करना चाहिए| क्योंकि एक तो तारा नहीं है, फाल्गुन और चैत्र मास में ही गणगौर का उत्सव आयोजित होता है| इसका समय सुनिश्चित है क्षय तिथि का इस त्योहार से कोई लेन देन नहीं है| गौरी तृतीया यानी की गणगौर की समाप्ति और देशभर में राजस्थानियों के प्रमुख त्यौहार की समाप्ति होगी गौरी तृतीया पर सोमवार 31 मार्च को.
सभा में सर्वश्री पंडित सुमित तिवारी तिथि गणित विशेषज्ञ, आलोक शर्मा भैरव शर्मा, सचिन शर्मा, प्रमोद तिवारी, रतन तिवारी एवं पंडित रवि कुमार शर्मा उपस्थित थे|
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